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Astrologer in india

Dr. Pradeep Pandya

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Rajjyotishi Research Center Director Dr. Pradeep Pandya Ratndeep have been awarded at international level to contribute in astrology, astrology Martanda, including 24 gold medals Astrology Bhaskar etc.

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News & Updates

  • One of the Observatories is situated at the bank of river kshipra.
  • Ujjaini is the Working place of King Vikramaditya.
  • Lord Krishna has studied here.
  • Ujjaini is the Working place of King Vikramaditya.

Importance of Ujjain

In terms of astrology:

गणेशं द्वारिकाधीशं हरसिद्धिं च भैरवम ।
वन्दे कालीं महाकालं, शिप्रामुज्जयिनीं श्रिये ।।

उज्जैयिनी को सभी तीर्थ से तिल भर बढ़ा बताया गया है । आप किसी भी तीर्थ यात्रा पर जा रहे है । उज्जैयिनी से ही सभी तीर्थ यात्रा का प्रारंभ बताया गया है । यहाँ किये गए अथवा कराये गये पूजा , अनुष्ठान , हवन , यज्ञ जाप इत्यादि का परिणाम शीघ्र एवं श्रेष्ठ मिलता है ।

तन्त्र शब्द के अनेक अर्थ हैं , उन्हीं में एक अर्थ आता है ''शिव - शक्ति की पूजा का विधान करने वाला शास्त्र''। अत: इसी अर्थ को लक्ष्य में रखते हुए भगवान महाकाल की पूजा के विधान को तन्त्र कहा जाता है । वैसे तन्त्र का ही पर्यायवाची शब्द आगम है । जिसका अर्थ आ-ग-म'' इन तीन वर्णों के आधार पर शवि के मुख से आना , गिरिजा - पार्वती के मुख में पहुँचना और वासुदेव -विष्णु के द्वारा अनुमोदित होना प्रतिपादित है । इस प्रकार तन्त्रों के प्रथम तन्त्रों के प्रथम प्रवक्ता भगवान शिव -महाकाल ही हैं ।

उज्जयिनी में साधना करने वाले साधकों में शैव , शाक्त , गाणपत्य , वैष्णव और सौर '' - तथा इन्हीं से सम्बदध भैरव , योगिनी आदि सभी प्रकार के देवी -देवताओं के साधक प्राचीन काल से रहे हैं । जिसके प्रमाण हमें यहाँ के प्रमुख देवस्थान एवं आसितक - समुदाय की प्रवृतित से प्राप्त होते हैं ।
1. शैव - साधना
2. भैरव - साधना
3. शक्ति - साधना :

शक्ति की उपासना तंत्र - शास्त्रों में प्रधानता को प्राप्त है । प्रत्येक साधक अपने इष्टदेव की शक्ति - सामथ्र्य को ही लक्ष्य में रखकर उनकी साधना में प्रवृत्त होता है । शडकराचार्य ने सौन्दर्य - लहरी के प्रथम पध में यह स्पष्ट ही कह दिया है कि शक्ति के बिना शिव भी शव ही हैं । जो साधक केवल शाक्तमंत्र का जप करता है और शैवमंत्र का सहयोजन नहीं करता हैं , उसे वह मंत्र पर्याप्त जप के पष्चात भी सिद्धिप्रद नहीं होता ।

महाकाल - शिव की उपासना के साथ ही भगवती हरसिद्धि की उपासना अवष्य करना चाहिये । शक्ति साधना के प्रमुख स्थल - हरसिद्धि - देवी गढ़कालिका नगरकोट की रानी चामुण्डा माता भूखी माता 64 योगिनी ।

उज्जयिनी में सिहस्थ ( कुभं ) - उज्जयिनी में :- सिंह राशि के गुरू में मेष का सूर्य आने पर उज्जयिनी में कुम्भ -( सिंहस्थ) - पर्व मनाया जाता है। उज्जयिनी का कुम्भ - पर्व सिंह के गुरू में होने से सिंहस्थ के नाम से ही प्रसिद्ध है।

उज्जयिनी में पूर्ण -कुम्भ :- सिंह - राशि से सप्तमराशी कुम्भराशी के कुम्भ में मेषराशि का सूर्य हो तब वैशाख मास में यह योग बनता है। इसी प्रसंग में यहाँ जो मेला लगता है, जन - समूह एकत्र होता है उसका प्रमुख उद्देश्य होता है - इस पर्वकाल में स्नान , दान आदि । विष्णुपुराण में कहा गया है कि - ।। सहरत्रं कार्तिके स्नानं माघे स्नानं शतानि च , वैशाखे नर्मदा कोटि: कुम्भस्नानेन तत्फलम ।।

(कार्तिक में हजार बार स्नान करने से , माघ में सैकडों बार स्नान करने से तथा वैशाख में करोड़ बार नर्मदा में स्नान करने से जो फल प्राप्त होता है , वह फल कुम्भ - पर्व में स्नान करने से प्राप्त होता है। )

शिप्रा स्नान का महत्व-
शिप्रा में वैशाखमास में स्नान करने का और स्नानादि करने का माहात्म्य तो है ही , किन्तु पूरे मास तक यहाँ स्नानादि सम्भव न हो , तो मात्र पाँच दिन ही स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और पूरे मास के स्नान का फल भी मिलता है। शिप्रा नदी तीनों लोकों में दुर्लभ है , प्रेत -मोक्षकारी है और सिंहस्थ स्नान -कर्ताओं के मनोवांछित को पूर्ण करने वाली है। विभिन्न ऋषियों के पूछने पर नारदजी ने भी सिंहस्थपर्व की महिमा विस्तार से बतलार्इ है।

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ख्वाब पूरा हुआ

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Mr. Girish valid and his wife Rina were upset enough time to my family. In the house where he lived, he was Petrik house. Rina and their children victimized by family always lived, and wanted a way out of the house. GIREESH was out because of his work. Their families were in touch with a Tantrik. Girish quite worried for his wife and children were afraid of the time was the worst. Gri extent that time

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